BCCI ने घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मैचों के लिए जारी किया Title Sponsor का टेंडर, जानें क्या हैं शर्तें और आख़िरी तारीख

 New Delhi, July 20, 2026: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने आगामी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैचों के लिए टाइटल स्पॉन्सरशिप राइट्स (Title Sponsor Rights) के लिए 'इन्विटेशन टू टेंडर' (ITT) जारी कर दिया है। बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इसकी घोषणा की और इच्छुक कंपनियों से बोलियां (Bids) आमंत्रित की हैं।

BCCI Title Sponsor Rights Tender 2026 and prohibited brand categories list

अगर कोई कंपनी भारतीय क्रिकेट टीम के मैचों की मुख्य प्रायोजक (Title Sponsor) बनना चाहती है, तो उसे बीसीसीआई द्वारा तय की गई सख्त शर्तों और नियमों का पालन करना होगा।

टेंडर से जुड़ी महत्वपूर्ण तारीखें (Important Timelines)

बीसीसीआई ने टेंडर प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए निम्नलिखित समय-सीमा तय की है:
  • टेंडर जारी होने की तिथि: 20 जुलाई, 2026
  • ITT खरीदने की आख़िरी तारीख: 4 अगस्त, 2026
  • स्पष्टीकरण (Clarifications) मांगने की आख़िरी तारीख: 5 अगस्त, 2026
  • बिड डाक्यूमेंट्स जमा करने की अंतिम तिथि: 13 अगस्त, 2026
नोट: टेंडर डॉक्यूमेंट (ITT) को खरीदने के लिए कंपनियों को 1,00,000 रुपये (+ 18% GST = कुल 1,18,000 रुपये) की नॉन-रिफंडेबल फीस चुकानी होगी। विदेशी कंपनियों के लिए यह फीस 1,050 USD तय की गई है। केवल फीस चुकाने वाली कंपनियों को ही टेंडर डॉक्यूमेंट ईमेल के जरिए शेयर किया जाएगा।

कौन सी कंपनियां कर सकती हैं आवेदन? (Eligibility Criteria)

बीसीसीआई ने इस बार स्पॉन्सर्स के लिए काफी कड़े वित्तीय और सामान्य नियम बनाए हैं:
  1. वित्तीय योग्यता (Financial Eligibility): बोली लगाने वाली कंपनी का पिछले 3 साल का औसत सालाना टर्नओवर (Turnover) या नेटवर्थ (Net Worth) कम से कम 100 करोड़ रुपये होना अनिवार्य है।
  2. भारतीय रजिस्ट्रेशन: केवल भारत में रजिस्टर्ड कंपनियां ही इसके लिए पात्र हैं। कोई भी व्यक्तिगत व्यक्ति (Individual) या जॉइंट वेंचर (Joint Venture) इसमें भाग नहीं ले सकता।
  3. फिट एंड प्रॉपर पर्सन: कंपनी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड, आर्थिक अपराध या आरबीआई (RBI) की 'विल्फुल डिफॉल्टर' लिस्ट में नाम नहीं होना चाहिए।

इन सेक्टर्स पर लगा बैन: ये कंपनियां नहीं लगा सकतीं बोली (Prohibited Categories)

बीसीसीआई ने भारतीय क्रिकेट की छवि को साफ-सुथरा रखने के लिए कई बड़े और आकर्षक सेक्टर्स को इस टेंडर प्रक्रिया से पूरी तरह प्रतिबंधित (Ban) कर दिया है। निम्नलिखित सेक्टर्स की कंपनियां बोली नहीं लगा सकती हैं:
  • सट्टेबाजी और जुआ: Betting, Gambling या किसी भी प्रकार की गेम प्रेडिक्शन/टिपिंग सर्विसेज।
  • क्रिप्टोकरेंसी और वेब3: Crypto Trading, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स या टोकनाइज्ड प्रोडक्ट्स।
  • रीयल मनी गेमिंग: Online Money Gaming, फैंटेसी स्पोर्ट्स (Fantasy Sports) या कोई भी ऐसा गेम जिसमें पैसे दांव पर लगते हों।
  • तंबाकू और अल्कोहल: शराब और तंबाकू से जुड़े ब्रांड्स।
  • सरोगेट ब्रांडिंग: किसी प्रतिबंधित ब्रांड को घुमा-फिराकर (Surrogate Advertising के जरिए) प्रमोट करने वाले ब्रांड्स पर भी पूरी तरह रोक है।

पहले से ब्लॉक कैटेगरीज (Blocked Categories)

बीसीसीआई के पास कुछ सेक्टर्स के स्पॉन्सर्स पहले से मौजूद हैं, इसलिए कोई भी नई कंपनी इन कैटेगरीज के लिए बोली नहीं लगा सकती (सिवाय मौजूदा स्पॉन्सर के):
  1. स्पोर्ट्सवियर और मर्चेंडाइज (Sportswear & Athleisure Wear)
  2. टायर्स और ट्यूब्स (Tyres, Tubes & Flaps)
  3. पेंट्स और वॉटरप्रूफिंग (Paints & Waterproofing)

क्रिकेट की दुनिया पर इसका क्या असर होगा?

बीसीसीआई का टाइटल स्पॉन्सर बनना दुनिया के सबसे बड़े विज्ञापनों में से एक माना जाता है। चूंकि रियल मनी गेमिंग (जैसे Dream11, MPL आदि) और क्रिप्टो कंपनियों को पूरी तरह बैन कर दिया गया है, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि एड-टेक (Ed-Tech), फिन-टेक (Fin-Tech) या ऑटोमोबाइल सेक्टर की कौन सी बड़ी कंपनी भारतीय क्रिकेट टीम की नई पहचान बनती है।
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